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Wednesday, April 15, 2020

कुशवाहा कांत और जयंत कुशवाहा जैसी प्रतिभाओं की परम्परा में सजल कुशवाहा अपने जासूसी उपन्यासों के कारण जाने जाते हैं। 

प्रस्तुत है उनकी कृति 

दिमाग की हत्या 


Saturday, April 4, 2020

 नमस्कार .

एक लम्बे अन्तराल के उपरांत पुनः आपकी सेवा में आ गया हूँ .

श्री आनंद  प्रकाश जैन ने "चंदर"- जो कि पति-पत्नी का संयुक्त लेखकीय नाम था - के लेखकीय नाम की स्थापना  से पूर्व अपने नाम से भी अनेक स्पाई थ्रिलर्स   लिखे थे. उन उपन्यासों में उनके नायक पंडित गोपाल शंकर होते थे. ये उपन्यास बाद में चंदर के नाम के अंतर्गत भी पुनः प्रकाशित हुए. 

इसी तरह का एक शानदार उपन्यास "अदृश्य मानव" आपकी सेवा में पहले ही प्रस्तुत किया जा चुका है. अब प्रस्तुत है 'अदृश्य मानव' के आगे की कहानी .

श्री आर. एस. तिवारी जी के सौजन्य से .

लन्दन  का अजनबी -१ 

लन्दन का अजनबी -२ 

Friday, November 23, 2018


शॉट, डाउन
                                                                एक तेज रफ़्तार क्राइम थ्रिलर

  - श्री विवेक राव

भारत में ऐसे अनेक अपराध कथा लेखक विगत वर्षों में चर्चा में आये जो अंग्रेजी में लिखते हैं. कई अंग्रेजी लेखकों की किताबों का अनुवाद भी प्रकाशित हुआ किन्तु किसी नवीन किताब का हिंदी अनुवाद कम से कम अपराध कथाओं के क्षेत्र में तो मेरी नज़र में नहीं आया. ऐसे में भारत के वे अपराध कथा लेखक जो अंग्रेजी में लिख रहे हैं, हिंदी पाठकों के लिए सर्वथा अनजाने ही हैं. हिंदी का बहुत बड़ा पाठक वर्ग ऐसा भी है जो अंग्रेजी उपन्यासों को भी पढता है लेकिन अधिकांशतः विख्यात लेखकों को, नए लेखकों से प्रायः तब तक एक दूरी रहती है- जब तक वे प्रसिद्ध न हो जाएँ. मैंने पाया कि ऐसे बहुत से लेखक हैं जिनके उपन्यास दमदार थे लेकिन उन्हें प्रसिद्धि न मिल सकी और फलस्वरूप वे अनजाने रह गए.  मेरे विचार में हमें नए लेखकों की दो-तीन कृतियों को तो अवश्य पढ़ना चाहिए और उल्लेखनीय होने पर उनका समुचित उल्लेख भी करना चाहिए. मैं निजी तौर पर प्रायः अपनी शक्ति भर नए अपराध कथा लेखकों की कृतियों को क्रय करके पढता हूँ. संकोचवश उन पर सार्वजानिक रूप से अपने विचार व्यक्त करने से मैं बचता रहा हूँ. किन्तु मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि अच्छी रचनाओं के विषय में अपने विचार व्यक्त करना इसलिए आवश्यक है जिससे मित्रगण उस रहना से अनजाने न रह जाएँ.   इसलिए अब से उन पर अपने विचार रखने का भी प्रयास करूँगा. इस प्रक्रिया का शुभारम्भ मैं श्री विवेक राव जी की बेहतरीन कृति “शॉट, डाउन” से कर रहा हूँ.
अजय देशमुख अपने छोटे भाई विशाल देशमुख उर्फ़ शॉट के शव पर जो कि मुंबई में एक रेलवे ट्रैक के निकट क्षत विक्षत अवस्था में मिला था कुछ ऐसे निशान देखता है जो कि ट्रेन से गिरने पर नहीं होने चाहिए थे. लेकिन शव परीक्षा रिपोर्ट में ऐसे किसी निशान का जिक्र नहीं मिलता. डॉ. से मिलने पर वह उसे उस समय की उसकी शोक की अवस्था में भ्रम होने का कारण बता कर ऐसे किसी भी निशान के होने से इनकार कर देता है. किन्तु अजय आश्वस्त नहीं हो पाता, उसे विश्वास नहीं होता कि उसने अस्थिर मानसिक अवस्था में ऐसे किन्ही निशानों की कल्पना कर ली जो कि वास्तव में थे ही नहीं. वह इस विषय में अधिक पड़ताल करने की कोशिश करता है तो हर कदम पर उसे निराशा ही मिलती है. वह स्वयं शॉट की मृत्युपूर्व ज़िन्दगी से अपरिचित ही होता है क्योंकि कोई 5वर्ष की अवधि से वह अपने भाई के संपर्क में नहीं था. लेकिन अजय हार नहीं मानता और हर संभावित द्वार खटखटाता है. आखिर उसे आशा की एक किरण मिलती है शव परीक्षा करने वाले डॉ की सहयोगी से. किन्तु तब शुरू होता है हत्या और आतंक का एक ऐसा सिलसिला जिसमें कोई सुरक्षित नहीं.
दूसरी ओर एक सॉफ्टवेयर मुग़ल एक क्रांतिकारी सर्विलांस प्रणाली लांच करने वाला है जिससे देश के सभी शहर न सिर्फ निगरानी में आ जायेंगे बल्कि अपूर्व  सुरक्षा प्रदान की जा सकेगी और अपराध की रोकथाम हो सकेगी.
उधर एक आतंकवादी गिरोह और उसका मास्टरमाइंड सारे शहर को कत्लो गारद करने का मंसूबा लिए एक ऐसी योजना पर चल रहा है कि जिसके कामयाब होने पर पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था तहस नहस हो जाएगी.
कथानक इन्ही तीनो आयामों में कुछ इस तरह भागता है कि पाठक को सांस नहीं लेने देता. ऐसी द्रुत रोमांच कथा कि जिसका रोमांच पृष्ट दर पृष्ट बढ़ता ही जाता है. जितना अजय देशमुख अपने दिवंगत भाई के विगत में जाता है उतना ही उसका और उसके साथियों के प्राण संकट में आ जाते हैं.
शिल्प की दृष्टि से कहानी दो आयामों में चलती है -एक में अजय की रोमांचक कथा है तो दूसरे में शॉट की लोमहर्षक कथा. एक वर्तमान में एक भूतकाल में. दोनों के अद्भुत मेल से कहानी में वह रवानी उत्पन्न होती है कि पाठक सांस रोके पृष्ट पलटता जाता है. रहस्य क्रमश उदघाटित होता है.
एक सर्वथा नवीन अभिकल्पना  पर लिखी गयी अनूठी रोमांच कथा जिसमें आधुनिक net आधारित व्यवस्थाओं के भयानक ख़तरों को अत्यंत लाघव से उजागर किया गया है. एक रोचक जासूसी उपन्यास के समस्त तत्वों के संतुलित आयोजन से निकली एक अत्यंत रोचक रोमांच कथा. एक ही बैठक में पठनीय.

Wednesday, October 10, 2018

प्लास्टिक की औरत


 श्री आनंद प्रकाश जैन हिंदी के जाने माने साहित्यकार थे।  उन्होंने अपनी धर्मपत्नी   श्रीमती चन्द्रकान्ता जैन के साथ मिलकर 'चन्दर के लेखकीय नाम  से  हिंदी जासूसी साहित्य में  अप्रतिम योगदान दिया। उन्होंने जेम्स बांड की तर्ज़ पर देसी स्पाई भोलाशंकर उर्फ़ बी एस की कल्पना की, जो कि भारत की काल्पनिक  स्पाई संस्था 'स्वीपका नंबर वन कार्ड था।  यद्यपि पात्र संरचना और कांसेप्ट जेम्स बॉन्ड का था किन्तु कथानक और प्रस्तुति सदैव खांटी देसी रही थी।   एक्शन के साथ हास्य और व्यंग्यात्मक शैली इनकी पहचान थी।       स्वीप के प्रमुख पंडित गोपालशंकर थे।  गोपालशंकर बाबू श्री दुर्गा प्रसाद खत्री के विख्यात उपन्यासों रक्त मंडल, सफ़ेद पिशाच इत्यादि के नायक थे।  सीधे वहां नायक को जोड़ देना इस दम्पति की विलक्षण सोच, हिंदी के  प्रारम्भिक जासूसी साहित्य के प्रति सम्मान  और गहन अध्ययन की  परिचायक थी। आज प्रस्तुत है इन्हीं चंदर का एक बेजोड़ हो हो स्पाई थ्रिलर – प्लास्टिक की औरत .



प्लास्टिक की औरत- प्रथम 

Tuesday, October 9, 2018

कत्ल की पहेली – एक तेज रफ़्तार मर्डर मिस्ट्री


श्री संतोष पाठक रचित कत्ल की पहेली एक ऐसी व्यूह रचना है जिसमें फंस कर बिना अंत तक पहुंचे निकलना असंभव है. इस पुस्तक को मैं निरंतर आधी रात तक पढ़ता रहा और समाप्त करके ही पुस्तक को रख सका. ये तब हुआ जब मुझे मर्डर मिस्ट्री कुछ खास पसंद नहीं आतीं. अगर थ्रिलर न मिले तो ये भी चलती है वाली मनोदशा वाले व्यक्ति से अगर पुस्तक छोड़ते न बने तो निश्चय जानिये कि पुस्तक में दम है.
कत्ल की पहेली एक पेचीदा, आदि से अंत तक रोचक, तेज रफ़्तार मर्डर मिस्ट्री है. भले ही मर्डर मिस्ट्री है किन्तु उपन्यास में रोमांच कभी कम नहीं होता. पहले पृष्ट से जो रोमांच शुरू होता है वह अंत तक कायम रहता है. और ये बात इस उपन्यास को विशिष्ट बनाती है. याद नहीं आता हिंदी में इतनी शानदार मर्डर मिस्ट्री पहले कब पढ़ी थी.
उपन्यास शुरू होता है नायक विक्रांत गोखले  के अपने ग्राहक साहिल भगत की खूबसूरत और बेवफा बीवी के पीछा करके अपने ग्राहक को उसकी बीवी की बेवफाई देखने का सजीव अवसर  प्रदान करने से. साहिल विक्रांत को वहां से चला जाने को कहता है लेकिन वह साहिल के वहां आने तक वहीँ बना रहता है. साहिल के आने से एन पहले विक्रांत बीवी के यार को वहां से निकल कर एक पनवाड़ी की दुकान तक जाते देखता है. फिर विक्रांत वहां से चला जाता है. साहिल उसी दौरान अपनी पत्नी के कत्ल के आरोप में गिरफ्तार हो जाता है.जिसका गवाह पत्नी का यार बनता है जिसने लौट कर साहिल को उसके हाथ में रिवाल्वर लिए देख लिया था और फ्लैट का दरवाजा बंद कर पुलिस को बुला लिया था. रिवाल्वर साहिल का, उस पर अँगुलियों के निशान उसके और उसे गोली चलते देखने वाला चश्मदीद गवाह. साहिल का कहना है कि उसने कत्ल नहीं किया. वह विक्रांत को कातिल की खोज के लिए नियुक्त करता है. विक्रांत जो खुद उसके वहां होने का गवाह था. फिर शुरू होती है एक ऐसी कहानी जो आपको पल पल पर चौंकती तो है लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुँचने नहीं देती.
कहानी मौलिक है और सारे चरित्र भी देशज हैं. संवाद, स्थितियां, घटनाएँ सभी एक ऐसे परिवेश का सृजन करते हैं जो जाना पह्चाना लगता है. कहानी में कहीं अश्लीलता नहीं है, जबकि नायक को ठरकी दिखाया गया है जो हर कहीं लार टपकाता चित्रित है. हाँ, कहानी में द्विअथी सम्वादों की छटा मिलती है जो रस की सृष्टि करती है.
लेखक की भाषा में अनोखा ओज और प्रभाव है जो कि लेखक की विशेषता है. भाषा शैली में  एक प्रवाह है जो आपको बाँध लेता है और अपने साथ बहा ले जाता है.
श्री पाठक ने उपन्यास में एकाधिक स्थानों पर सम्प्रति हिंदी के शीर्ष अपराध कथा लेखक श्री सुरेन्द्र मोहन पाठक साहब से प्रभावित होना मुक्त कंठ से स्वीकार किया है. उनके इस उपन्यास में पाठक साहब की भाषा-शैली और चरित्र चित्रण का प्रभाव स्पष्ट परिलक्षित होता है किन्तु इतने पर भी कहना होगा कि श्री पाठक ने पाठक साहब का अनुसरण किया है अनुकरण नहीं किया है.  
श्री पाठक की खूबी मौलिक कथानक है तो खामी चरित्र चित्रण पर पर्याप्त ध्यान न देना है, वरना नायक को पुलिस के मुखबिर जैसा न दिखाते. लेकिन इसी नायक के अंदर ये खूबी भी है कि जब एक महिला उसके फ़्लर्ट करने पर अप्रसन्नता व्यक्त करती है तो यह उससे तत्काल क्षमा भी मांग लेता है. निश्चय ही यह वर्णन नायक के चरित्र  को एक नवीन आयाम प्रदान करता है. मैंने तो आज तक जितने भी जासूसी नावेल पढ़े हैं किसी के नायक में भी यह खूबी नहीं पाई है. फिर भी अगर लेखक पात्रों के चरित्र चित्रण पर अधिक ध्यान दें तो पुस्तक में और अधिक निखार आ जायेगा. खासकर मुख्य पात्रों के चरित्र चित्रण में. पुलिस को इस उपन्यास में कहीं अधिक सॉफ्ट दिखाया है, यह बात नायक के चरित्र के उभरने में बाधा है. ये बातें इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती हैं क्योंकि लेखक का उपन्यास आला दर्जे का है और उसमें ऐसी छोटी-छोटी त्रुटियाँ उसके पूर्ण प्रभाव को उद्घाटित होने से रोकती हैं. इतने पर भी उपन्यास विश्वस्तरीय बन पड़ा है. न सिर्फ पठनीय वरन संग्रहणीय.
पुस्तक की साज-सज्जा के विषय में तो इतना ही कहना पर्याप्त है कि यह सूरज पॉकेट बुक्स का प्रकाशन है. शानदार पुस्तक.

आप भी आजमा कर देखिये कि आपके पास इस पहेली का हल है या नहीं.


Sunday, October 7, 2018

अदृश्य मानव


श्री आनंद प्रकाश जैन ने "चंदर"- जो कि पति-पत्नी का संयुक्त लेखकीय नाम था - के लेखकीय नाम की स्थापना  से पूर्व अपने नाम से भी अनेक स्पाई थ्रिलर्स   लिखे थे. उन उपन्यासों में उनके नायक पंडित गोपाल शंकर होते थे. ये उपन्यास बाद में चंदर के नाम के अंतर्गत भी पुनः प्रकाशित हुए. 

इसी तरह का एक शानदार उपन्यास है- अदृश्य मानव.
श्री आर. एस. तिवारी जी के सौजन्य से .
 

अदृश्य मानव -प्रथम 

अदृश्य मानव - द्वितीय 

Saturday, September 22, 2018

भयंकर जासूस

हिंदी में अनेक भूत लेखक प्रारम्भ से ही चलन में रहे हैं. प्रस्तुत उपन्यास जासूसी फंदा के वर्ष १२  अंक ६  में प्रकाशित हुआ था . इसके रचनाकार श्री नकाबपोश भेदी  हैं. यह अनुप्लब्ध उपन्यास श्री आर. एस. तिवारी साहब के सौजन्य से -


कुशवाहा कांत और जयंत कुशवाहा जैसी प्रतिभाओं की परम्परा में सजल कुशवाहा अपने जासूसी उपन्यासों के कारण जाने जाते हैं।  प्रस्तुत है उनकी कृ...